हनुमानगढ़ जिले के शहरी-सीमांत क्षेत्रों में भूमि उपयोग परिवर्तन के प्रतिरूपः एक कालानुक्रमिक विश्लेषण

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गुलाब चंद्र
डॉ. पिंकी कुमारी

Abstract

शहरी कारणों के विकास और जनसंख्या वृद्धि के परिणामस्वरूप शहरों की सीमाओं के बाहर भूमि उपयोग में लगातार परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। शहरी-सीमान्त क्षेत्र ऐसे संक्रमण क्षेत्र हैं जहाँ शहरी एवं ग्रामीण विषेषताएं एक साथ उपस्थित रहती हैं। इन क्षेत्रों में भूमि उपयोग में होने वाले परिवर्तन समय के साथ गतिषील रहे हैं, जो सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय संरचना को प्रभावित करते हैं।


प्रस्तुत अध्ययन का मुख्य उद्देश्य हनुमानगढ़ ज़िले के शहरी-सीमान्त क्षेत्रों में भूमि उपयोग परिवर्तन के प्रतिरूप एवं उसके समयानुसार होने वाले बदलाव का विश्लेषण करना है। इस अध्ययन में विभिन्न समयावधीयों में भूमि उपयोग के स्वरूप का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। इसके अंतर्गत कृषि भूमि, आवासीय क्षेत्र, निर्मित क्षेत्र तथा अन्य भूमि उपयोग वर्गों में होने वाले परिवर्तन को विषिष्ट रूप से विश्लेषित किया गया है।


अध्ययन में प्राथमिक एवं द्वितीयक तथ्यों का उपयोग किया गया है। तथ्य विश्लेषण के लिए प्रतिशत, तालायात्मक विवरण एवं समयानुसार तुलना की विधि अपनाई गई है। अध्ययन के परिणाम स्वरूप यह स्पष्ट हुआ है कि शहरी विस्तार के कारण कषि भूमि में लगातार कमी हुई है तथा आवासीय एवं निर्मित क्षेत्रों में वद्धि हुई है।


अध्ययन के निष्कर्ष शहरी-सीमान्त क्षेत्रों में भूमि उपयोग नियोजन के महत्व को उजागर करते हैं तथा भविष्य में सुचित, सम्बन्धित एवं सन्तिलित शहरी विकास की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

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How to Cite
[1]
ग. च. . and डॉ. पिंकी कुमारी, “हनुमानगढ़ जिले के शहरी-सीमांत क्षेत्रों में भूमि उपयोग परिवर्तन के प्रतिरूपः एक कालानुक्रमिक विश्लेषण”, IEJRD - International Multidisciplinary Journal, vol. 11, no. 1, p. 12, Feb. 2026.

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