शहरीकरण का सामाजिक संरचना पर प्रभावः पारिवारिक व्यवस्था, वर्ग विभाजन और सामाजिक गतिशीलता का विश्लेषण

Authors

  • दीपक मीणा श्री जगदीशप्रसाद झाबरमल टिबरेवाला विश्वविद्यालय, विद्यानगरी, झुंझुनूं (राजस्थान)
  • डॉ. मनोज कुमार श्री जगदीशप्रसाद झाबरमल टिबरेवाला विश्वविद्यालय, विद्यानगरी, झुंझुनूं (राजस्थान)

Keywords:

शहरीकरण, सामाजिक संरचना, पारिवारिक व्यवस्था, वर्ग विभाजन, सामाजिक गतिशीलता, सामाजिक परिवर्तन, भारतीय समाज

Abstract

आधुनिक युग में शहरीकरण एक ऐसी व्यापक सामाजिक-आर्थिक प्रक्रिया के रूप में उभरा है, जिसने मानव समाज की संरचना, कार्यप्रणाली और जीवन-शैली को गहराई से प्रभावित किया है। औद्योगिकीकरण, तकनीकी विकास, रोजगार के अवसरों का संकेंद्रण तथा आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता के कारण जनसंख्या का निरंतर ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर प्रवासन हुआ है। इस प्रक्रिया ने न केवल भौतिक परिवेश को बदला है, बल्कि सामाजिक संबंधों, पारिवारिक ढाँचों, वर्गीय संरचना तथा सामाजिक गतिशीलता के स्वरूप में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन उत्पन्न किए हैं।

प्रस्तुत लेख का उद्देश्य शहरीकरण के सामाजिक प्रभावों का विश्लेषण करना है, विशेष रूप से यह समझना कि शहरीकरण ने पारंपरिक पारिवारिक व्यवस्था को किस प्रकार प्रभावित किया है, समाज में वर्ग विभाजन की प्रकृति को कैसे बदला है तथा सामाजिक गतिशीलता के नए अवसरों और चुनौतियों को किस रूप में जन्म दिया है। अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि जहाँ एक ओर शहरीकरण ने संयुक्त परिवार प्रणाली को कमजोर कर एकल एवं नाभिकीय परिवारों को बढ़ावा दिया है, वहीं दूसरी ओर इसने सामाजिक संबंधों को अधिक औपचारिक, व्यक्तिवादी एवं उपयोगितावादी बनाया है।

लेख यह भी दर्शाता है कि शहरी समाज में वर्ग विभाजन केवल आर्थिक आधार पर सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, व्यवसाय, जीवन-शैली और उपभोग के पैटर्न के आधार पर भी नए सामाजिक वर्गों का निर्माण हुआ है। शहरीकरण ने सामाजिक गतिशीलता को तीव्र किया है, जिससे व्यक्तियों को सामाजिक-आर्थिक उन्नति के अवसर प्राप्त हुए हैं, परंतु इसके साथ ही असमानता, सामाजिक बहिष्करण और वर्गीय दूरी जैसी समस्याएँ भी उभरकर सामने आई हैं।

यह अध्ययन मुख्यतः सैद्धांतिक एवं विश्लेषणात्मक पद्धति पर आधारित है तथा विभिन्न समाजशास्त्रीय अवधारणाओं और भारतीय सामाजिक संदर्भों के माध्यम से शहरीकरण और सामाजिक संरचना के बीच के संबंधों को समझने का प्रयास करता है। निष्कर्षतः, लेख यह प्रतिपादित करता है कि शहरीकरण एक द्वैध प्रक्रिया है, जो सामाजिक विकास और अवसरों के साथ-साथ सामाजिक विघटन और असंतुलन की स्थितियाँ भी उत्पन्न करती है, जिनका संतुलित एवं समावेशी दृष्टिकोण से समाधान आवश्यक है।

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Published

2026-02-10

How to Cite

[1]
“शहरीकरण का सामाजिक संरचना पर प्रभावः पारिवारिक व्यवस्था, वर्ग विभाजन और सामाजिक गतिशीलता का विश्लेषण”, IEJRD - International Multidisciplinary Journal, vol. 11, no. 1, p. 10, Feb. 2026, Accessed: Sep. 29, 2026. [Online]. Available: https://www.iejrd.com/index.php/iejrd/article/view/3225

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